19% महंगी हुई चीनी: देश में क्यों गहराया शक्कर का संकट और 30 साल के निचले स्तर पर कैसे पहुंचा स्टॉक? जानिए इनसाइड स्टोरी

विशेष रिपोर्ट: देश के रिटेल बाजारों में त्योहारों से ठीक पहले मिठास कड़वी होने लगी है। पिछले 50 दिनों में चीनी का सरकारी औसत मूल्य 19% बढ़कर ₹55.7 प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि कई शहरों के खुदरा बाजारों में यह ₹65 से ₹70 प्रति किलो तक बिक रही है। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक देश भारत अब इस किल्लत से निपटने के लिए 10 लाख टन चीनी आयात करने की तैयारी में है।
आखिर निर्यात करने वाले देश को चीनी क्यों खरीदनी पड़ रही है? क्या आने वाले त्योहारी सीजन में कीमतें और बढ़ेंगी? प्रस्तुत है आंकड़ों और विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर इस पूरे संकट की विस्तृत पड़ताल।
चीनी संकट के मुख्य कारण
1. उत्पादन में गिरावट और रिकवरी रेट में कमी
नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के उपाध्यक्ष केतन पटेल के अनुसार, पिछले सत्र में हुई अत्यधिक बारिश से गन्ने की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था। इससे शुगर रिकवरी रेट (100 किग्रा गन्ने से बनने वाली चीनी का प्रतिशत) 12% से घटकर नीचे आ गया। परिणामस्वरूप, जहां 3.2 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान था, वहीं कुल उत्पादन घटकर लगभग 3 करोड़ टन पर ही सिमट गया।
2. एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी का असर
गन्ने के रस और शीरे का एक बड़ा हिस्सा चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल उत्पादन में डायवर्ट किया जा रहा है। रेटेड एजेंसी ICRA के आंकड़ों के मुताबिक:
अनुमानित कुल उत्पादन: ~3.1 करोड़ टन
एथेनॉल में खपा उत्पादन: ~31 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने का शीरा
वास्तविक (नेट) चीनी उत्पादन: 2.8 करोड़ टन
देश में सालाना खपत: 2.83 करोड़ टन
सूत्रों के अनुसार कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अधिकारी शंकर ठक्कर का कहना है कि एथेनॉल नीति के कारण घरेलू बाजार में सप्लाई घटने की चेतावनी पिछले तीन सालों से दी जा रही थी, जिसका असर अब सामने आ रहा है।
3. निर्यात नीति में देरी और स्टॉक का गलत आकलन
केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 15 लाख टन और फरवरी 2026 में अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। घरेलू बाजार में सप्लाई की कमी और बढ़ते दामों को देखते हुए मई 2026 में निर्यात पर बैन लगाया गया, लेकिन तब तक 8 लाख टन चीनी देश से बाहर भेजी जा चुकी थी।
उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, मार्च 2026 से ही मिलों से आपूर्ति का संकट शुरू हो गया था, लेकिन निर्यात पर रोक लगाने में 2 महीने की देरी हुई। गलत आंकड़ों के कारण घरेलू स्टॉक 47 लाख टन से घटकर केवल 39 लाख टन रह गया।
30 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर ओपनिंग स्टॉक
भारत में चीनी का नया पेराई सीजन 1 अक्टूबर से शुरू होता है और देश में सालाना 2.6 करोड़ से 2.8 करोड़ टन चीनी की खपत होती है। आमतौर पर 30 सितंबर (सीजन के अंत) तक 60 से 70 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक सुरक्षित रखा जाता है।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 तक चीनी मिलों के पास केवल 35 लाख टन का स्टॉक ही बचने का अनुमान है। यह पिछले तीन दशकों (30 साल) में सबसे कम स्टॉक स्तर है।
चीनी के क्लोजिंग स्टॉक की स्थिति (तथ्यात्मक आंकड़ा)
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│मानक आवश्यक स्टॉक (3महीने की खपत)│ 60 - 70लाख टन│
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│वर्ष2025-26का पूर्व स्टॉक│ 47लाख टन│
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│आगामी1अक्टूबर2026का अनुमानित स्टॉक│ 35लाख टन│
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आगे क्या? क्या और बढ़ेंगे दाम?
अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और दीपावली जैसे त्योहारों के कारण मिठाइयों और बेवरेजेस (प्रोसेस्ड फूड) की मांग चरम पर होती है।
आपूर्ति में रुकावट की आशंका: बॉम्बे शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक जैन के अनुसार, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग को देखते हुए चीनी मिलें सप्लाई धीरे-धीरे रिलीज कर रही हैं, क्योंकि उन्हें आने वाले दिनों में कीमतों में और तेजी की उम्मीद है।
राहत कब मिलेगी: महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश से गन्ने की पैदावार प्रभावित हुई है। मिलों में गन्ने की नई पेराई नवंबर से शुरू होगी। तब तक बाजार इसी सीमित स्टॉक और सरकार द्वारा मंगाए जा रहे 10 लाख टन आयातित चीनी पर निर्भर रहेगा।












