एनओसी के बिना शुरू हुआ पुल निर्माण अटका, पीएमजीएसवाय की लापरवाही से ग्रामीण हलाकान

गरियाबंद/सूत्र: जिले के ग्राम पंचायत अमाड़ क्षेत्र में जुगाड़ से अमाड़ मार्ग पर पट्टाबहाल नाला पर प्रस्तावित पुल निर्माण कार्य ठप पड़ जाने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। करीब 1 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस पुल का टेंडर पिछले वर्ष जारी हुआ था और दिसंबर में निर्माण कार्य शुरू भी कर दिया गया था, लेकिन अब काम बीच में ही रोक दिया गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, पहले आवागमन के लिए यहां एक रपटा मौजूद था, जिसे पुल निर्माण के लिए तोड़ दिया गया। नींव की खुदाई के बाद अचानक काम बंद हो गया, जिससे अब लोगों को कच्चे अस्थायी रपटा के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है। हल्की बारिश में इसके बह जाने का खतरा बना हुआ है, जिससे बरसात में हालात और भी संगीन हो सकते हैं।
इस मार्ग के बंद होने से अमाड़, देवझर, अमली और कुमकोट जैसे गांवों का संपर्क टूटने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं, स्कूली बच्चों और मरीजों पर पड़ेगा, साथ ही रोजमर्रा की जरूरतों की आपूर्ति भी प्रभावित होगी।
ग्रामीणों ने कलेक्टर को दरख्वास्त देकर मांग की है कि 15 दिनों के भीतर निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया जाए और अस्थायी रपटा को सुरक्षित बनाने के लिए उस पर सीमेंट नाली डाली जाए, ताकि बारिश में बहाव रोका जा सके।
फारेस्ट एनओसी नहीं, विभागीय लापरवाही उजागर
जानकारी के अनुसार, यह क्षेत्र उदंति-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है, जहां निर्माण कार्य के लिए फारेस्ट विभाग से एनओसी लेना जरूरी होता है। हालांकि, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY), गरियाबंद द्वारा बिना एनओसी के ही काम शुरू कर दिया गया। उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि अब तक विभाग की ओर से एनओसी के लिए कोई पत्राचार नहीं किया गया है और टेंडर के एक साल बाद अब जाकर डीजीपीएस सर्वे किया जा रहा है।
इस मामले में कलेक्टर बी.एस. उइके ने कहा कि फारेस्ट एनओसी के अभाव में कार्य रोका गया है। फिलहाल ग्रामीणों की सहूलियत के लिए अस्थायी रपटा तैयार कराया जाएगा।
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तय समय में समस्या का हल नहीं निकाला गया, तो वे मुख्य मार्ग 130-सी पर चक्काजाम करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


















