छत्तीसगढ़: वेतन विसंगति को लेकर KVK कर्मचारियों का हल्लाबोल, 16 फरवरी से प्रदेशव्यापी पांच दिवसीय हड़ताल

रायपुर/छत्तीसगढ़: प्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। छत्तीसगढ़ के कृषि विज्ञान केंद्रों के संघ द्वारा आगामी 16 से 20 फरवरी 2026 तक पांच दिवसीय प्रदेशव्यापी ‘कामबंद हड़ताल’ और धरना-प्रदर्शन का निर्णय लिया गया है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आंदोलन वेतन विसंगति, सेवा-लाभ बहाली और अन्य जायज मांगों को लेकर किया जा रहा है।

क्या हैं मुख्य मांगें और विवाद की वजह?
कर्मचारी संघ के अनुसार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और होस्ट संस्थान के बीच हुए समझौते (MoU) के तहत बेसिक पे, DA और HRA के अलावा अन्य सभी भत्तों और सेवा संबंधी देयताओं का वहन होस्ट संस्थान को करना होता है।
आंदोलन के प्रमुख बिंदु:
* वेतन विसंगति: लंबे समय से लंबित वेतन विसंगतियों का निराकरण।
* भत्तों की बहाली: वैधानिक भत्तों और एरियर का पूर्ण भुगतान।
* कैरियर उन्नयन योजना (CAS): समयबद्ध प्रमोशन और उच्च वेतनमान का लाभ।
* समान कार्य-समान वेतन: ‘समान कार्य हेतु समान वेतन’ के सिद्धांत का पालन सुनिश्चित करना।
* सेवा नियम: विश्वविद्यालय अधिनियम-1987 के तहत संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों की रक्षा।
“अंतिम चेतावनी” – पांच दिन में निर्णय नहीं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल, डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि इन पांच दिनों के भीतर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई स्पष्ट, लिखित और समयबद्ध निर्णय नहीं लिया गया, तो संघ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होगा।
“हमने बार-बार लिखित और मौखिक रूप से प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन आज तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इस स्थिति में शैक्षणिक, प्रशासनिक और कृषि-प्रसार गतिविधियों में होने वाले व्यवधान की पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।” — संघ प्रतिनिधि
शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तैयारी
संघ ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण, अनुशासित और लोकतांत्रिक तरीके से होगा। समस्त KVK कर्मचारी सामूहिक रूप से काम बंद कर टेंट लगाकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। संघ को उम्मीद है कि माननीय कुलपति महोदय इस विषय की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र सकारात्मक हस्तक्षेप करेंगे ताकि हड़ताल की स्थिति को आगे बढ़ने से रोका जा सके।


















