प्रतिबंध के बावजूद गरियाबंद में धड़ल्ले से अवैध बोर खनन, जल संकट के बीच प्रशासन पर उठे सवाल
गरियाबंद: जिले में भूजल संरक्षण को लेकर प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद अवैध बोरवेल खनन का मामला सामने आया है। गरियाबंद ब्लॉक के ग्राम सढ़ौली, छिंदोला, खुर्सीपार मोहलाई तथा छुरा क्षेत्र में रात के अंधेरे में बिना अनुमति निजी बोरवेल खनन किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय स्तर पर यह गतिविधि खुलेआम जारी रहने से प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दरअसल, बढ़ती गर्मी और संभावित जल संकट को देखते हुए कलेक्टर बी.एस. उइके ने छत्तीसगढ़ पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत 1 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक पूरे गरियाबंद जिले को जलाभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। इस अवधि में बोरवेल खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि ग्रीष्मकाल में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके और भूजल स्तर का संरक्षण हो।
इसके बावजूद, ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिबंध की अनदेखी कर बोरवेल खनन किए जाने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, एक बोरवेल फर्म की गाड़ियां शाम होते ही गरियाबंद-रायपुर रोड पर सक्रिय हो जाती हैं और अंधेरा होते ही अपने निर्धारित बोर पॉइंट पर पहुंचकर खनन कार्य शुरू कर देती हैं। बताया जा रहा है कि वर्तमान में गरियाबंद ब्लॉक में लगभग 4 बोरवेल फर्म सक्रिय हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह समस्या केवल कुछ गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे मामले में दलालों का एक सक्रिय नेटवर्क काम कर रहा है, जो प्रति बोरवेल मोटा कमीशन वसूल रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अनियंत्रित बोरवेल खनन से भूजल स्तर तेजी से नीचे जाता है, जिससे भविष्य में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है। यही कारण है कि प्रशासन ने एहतियातन प्रतिबंध लागू किया था, लेकिन उसके पालन में कमी चिंता का विषय बनती जा रही है।
मामले को लेकर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) गरियाबंद, सुश्री हितेश्वरी बाघे ने बताया कि प्रतिबंध अवधि में किसी भी किसान को बोरवेल खनन की अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि अब तक कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी, लेकिन पत्रकारों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर मामले में संज्ञान लेकर जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब स्पष्ट प्रतिबंध लागू है, तो फिर अवैध खनन कैसे जारी है? क्या यह प्रशासनिक निगरानी में कमी है या संगठित स्तर पर नियमों की अनदेखी? यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा असर जिले की जल सुरक्षा पर पड़ सकता है।


















