विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम 2025: गांवों की तस्वीर और तकदीर बदलने वाला क्रांतिकारी कदम

गरियाबंद: प्रदेश के खाद्य मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल ने जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित एक पत्रकारवार्ता में ‘विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम 2025’ को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय किसानों और मजदूरों को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

मनरेगा से कितना अलग और बेहतर है यह अधिनियम?
मंत्री बघेल और प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने इस नए अधिनियम की तुलना मनरेगा से करते हुए इसके प्रमुख लाभ गिनाए:
- रोजगार की गारंटी: मनरेगा में मिलने वाले 100 दिनों के रोजगार को बढ़ाकर अब 125 दिन कर दिया गया है।
- त्वरित भुगतान: मजदूरी का भुगतान अब 7 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा।
- विलंब शुल्क (ब्याज): यदि भुगतान में देरी होती है, तो मजदूर को अतिरिक्त राशि (ब्याज स्वरूप) दी जाएगी।
- कृषि कार्यों को प्राथमिकता: बुवाई और कटाई के समय 60 दिनों का ‘वर्क हॉलिडे’ रखा जा सकेगा, ताकि किसानों को मजदूर मिल सकें और कृषि कार्य प्रभावित न हों।
पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर प्रहार
अमित चिमनानी ने स्पष्ट किया कि यह अधिनियम मनरेगा की पुरानी खामियों जैसे फर्जी मास्टर रोल और मशीनों के अवैध उपयोग को समाप्त करेगा। नई व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होगी, जिससे वास्तविक मजदूरों को सीधा लाभ मिलेगा और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी।
विकास के 4 मुख्य स्तंभ
इस अधिनियम के तहत ग्रामीण विकास को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
- जल सुरक्षा: जल संरक्षण, सिंचाई संरचनाओं और नदी-नालों का जीर्णोद्धार।
- ग्रामीण अधोसंरचना: गांवों में स्थायी बुनियादी ढांचे का निर्माण।
- आपदा सुरक्षा: प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए ठोस कार्ययोजना।
- आजीविका संवर्धन: कौशल विकास, पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा।
इस महत्वपूर्ण पत्रकारवार्ता के दौरान पूर्व सांसद चंदूलाल साहू, राजिम विधायक रोहित साहू, जिला भाजपा अध्यक्ष अनिल चंद्राकर सहित संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।












