क्या आपको पता है?बैंक डिजिटल पेमेंट पर चुपचाप वसूल रहे फीस

रायपुर : लॉकडाउन के दौरान डिजिटल ट्रांजेक्‍शन का वॉल्‍यूम काफी बढ़ा है. वहीं, डिजिटल ट्रांजेक्‍शन की प्रोसेसिंग मुफ्त करने से हुए नुकसान का बोझ बड़े प्राइवेट बैंक ग्राहकों पर डाल रहे हैं. इन बैंकों ने हाई फ्रीक्‍वेंसी और छोटी रकम के डिजिटल पेमेंट पर अलग-अलग तरह की प्रोसेसिंग फीस लेनी शुरू कर दी है. एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक सभी ने ऐसा किया है।

बैंकर और पेमेंट एग्‍जीक्‍यूटिव ने बताया कि पिछले साल सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई पर मर्चेंट डिस्‍काउंट रेट (एमडीआर) खत्‍म कर दिया था. इसके चलते बैंकों को अपनी डिजिटल स्‍ट्रैटेजी को उसी की तर्ज पर बनाना पड़ रहा है. वे इस फीस से होने वाली कमाई के नुकसान की भरपाई करना चाहते हैं. इसके अलावा बैकएंड सिस्‍टम्‍स पर डिजिटल वॉल्‍यूम में भारी बढ़ोतरी भी उन्‍हें पेमेंट के गणित के बारे में सोचने पर मजबूर कर रही है।

एमडीआर (मर्चेंट डिस्‍काउंट रेट) वह फीस है जो डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए बैंक मर्चेंट्स से वसूलते हैं. सरकार ने बीते साल यूपीआई और रुपे पर इस फीस को नहीं लेने का फैसला किया था. एचफडीएफसी बैंक ने अपनी इंटरनेट बैंकिंग सेवाओं के लिए फ्लैट 10 रुपये का सरचार्ज लगाना शुरू किया है. मोबाइल फोन के बिल का पेमेंट, प्रीपेड वॉलेट को रिचार्ज और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों को पेमेंट करने जैसे छोटे ट्रांजेक्‍शन पर इसे लिया जा रहा है।

इस बीच एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक ने भी यूपीआई से पेमेंट ट्रांसफर करने पर प्रोसेसिंग फीस लेना शुरू कर दिया है. इसे 20 ट्रांजेक्‍शन की मासिक सीमा खत्‍म होने के बाद लिया जाता है. बैंकों ने 1000 रुपये से कम के पीयर-2-पीयर ट्रासंफर पर 2.5 रुपये वसूलने शुरू किए हैं. वहीं, बाकी के लिए यह फीस 5 रुपये है। अप्रैल में कोटक महिंद्रा ने 20 फ्री ट्रांजेक्‍शन की लिमिट निर्धारित की थी. वहीं मई में आईसीआईसीआई बैंक और जून में एक्सिस बैंक ने ऐसा किया था। जानकार कहते हैं आने वाले महीनों में और बैंक इनकी देखादेखी ‘सुविधा’ और ‘प्रोसेसिंग फीस’ लेना शुरू कर सकते हैं।

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KR. MAHI

CHIEF EDITOR KAROBAR SANDESH

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