ज्यादा बारिश, कम फसल और बढ़ती महंगाई: आटा से लेकर तेल-चावल तक सब महंगे, जानें कब घटेंगे दाम?

नई दिल्ली: उम्मीद से ज्यादा मॉनसूनी बारिश , कम फसल उत्पादन और कमजोर होते रुपये ने देश के घरों की किचन का बजट खराब कर दिया है। रिटेल और कृषि व्यवसाय के अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक महीने में खाद्य तेल, चावल, आटे और सब्जियों सहित प्रमुख खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। पिछले दो-चार हफ्तों में सरसों और सूरजमुखी तेल, चावल और टमाटर की कीमतों में 50% तक की बढ़ोतरी हुई है। पिछले महीने गेहूं के आटे, मैदा, सूजी और चीनी की कीमतों में भी 6% तक की वृद्धि हुई है।

गिरते रुपये से महंगा हुआ तेल

रुपये की कीमत में भारी गिरावट आई है। 15 जुलाई को एक अमेरिकी डॉलर 85.90 रुपये का था, जो 5 अगस्त को 87.82 रुपये हो गया। इससे बाहर से आने वाले तेल के दाम बढ़ गए हैं। सूत्रो के अनुसार AWL एग्री बिजनेस के मैनेजिंग डायरेक्टर, अंग्शु मलिक का कहना है कि एक्सचेंज रेट में दो रुपये का भी फर्क आने से बाहर से आने वाला तेल महंगा हो जाता है। मलिक का यह भी मानना है कि इस साल सरसों का उत्पादन 10-10.5 मिलियन टन रहेगा, जबकि सरकार ने 11.5-12 मिलियन टन का अनुमान लगाया था।

कितना महंगा हुआ तेल?

पिछले तीन महीनों में सरसों के तेल की कीमत लगभग 30% या 40 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई है। सोयाबीन, सूरजमुखी और पाम तेल के दाम पिछले एक महीने में 10-15% बढ़े हैं। अप्रैल और मई में बेमौसम बारिश और मौसम के बिगड़ने से नारियल के उत्पादन में 9% की गिरावट आई है, जिससे सप्लाई और डिमांड में अंतर आ गया है।

क्रिसिल रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर राहुल गुहा का कहना है कि पाम, सूरजमुखी और सोयाबीन तेल भारत में इस्तेमाल होने वाले तेल का 85% से ज्यादा हिस्सा हैं। इनकी सप्लाई कम होने और स्टॉक कम होने की वजह से पिछले दो महीनों में इनके दाम बढ़े हैं। हालांकि, गुहा का कहना है कि सरकार द्वारा हाल ही में ड्यूटी में कटौती करने से इस वित्त वर्ष में घरेलू औसत कीमतों में थोड़ी गिरावट आ सकती है।

चीनी-चावल कितने महंगे?

चीनी के दाम फैक्ट्री गेट पर पिछले साल के मुकाबले 7-8% ज्यादा हैं, क्योंकि फसल कम हुई है। पिछले महीने इसमें 4% की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि बिक्री का कोटा कम है और त्योहारों की मांग ज्यादा है। बांग्लादेश और केन्या सरकार द्वारा चावल आयात करने की घोषणा के बाद चावल के दाम भी पिछले दो हफ्तों में 10-15% बढ़ गए हैं। बांग्लादेश 900,000 टन चावल खरीदेगा, जबकि केन्या 500,000 टन चावल आयात करेगा। स्वर्णा किस्म के चावल की कीमत 29 रुपये/किलो से बढ़कर 32.50 रुपये हो गई है।

कब कम होगी कीमत?

इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि कुछ चीजों में महंगाई का यह उछाल अस्थायी है और दो-तीन महीनों में नई फसल आने पर यह कम हो जाएगा। क्रिसिल के गुहा का कहना है कि अक्टूबर-नवंबर में पाम और सूरजमुखी की अच्छी फसल होने की उम्मीद है, जिसके बाद खाने के तेल के दाम कम हो जाएंगे।

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