प्राइवेट अस्पतालों में नहीं हो रहा गरीबों का फ्री इलाज! सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू की है, जिसमें सरकारी जमीन या रियायतों पर बने निजी अस्पतालों में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) व गरीबी रेखा से नीचे (BPL) के मरीजों को मुफ्त इलाज न देने का मुद्दा उठाया गया है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में नोटिस जारी किया है।
संदीप पांडेय ने दायर की याचिका
यह याचिका मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय ने दाखिल की है। उनका कहना है कि जिन निजी अस्पतालों को सरकारी जमीन रियायती दर पर दी गई थी, उन्हें EWS और BPL मरीजों को फ्री इलाज देना था, लेकिन अस्पतालों ने इस शर्त का पालन नहीं किया।
बार-बार रिपोर्ट में खुलासा, फिर भी कार्रवाई नहीं
पीआईएल में कहा गया है कि दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा और ओडिशा सहित कई राज्यों की ऑडिट रिपोर्ट और सरकारी जांचें बार-बार इस उल्लंघन को सामने ला चुकी हैं।
- दिल्ली: अस्पतालों को एक-तिहाई बिस्तर फ्री इलाज के लिए रखने की शर्त थी, लेकिन पालन न होने पर 2007 में दिल्ली हाई कोर्ट ने फटकार लगाई थी।
- महाराष्ट्र: 2016 की CAG रिपोर्ट में पाया गया कि अतिरिक्त FSI मिलने के बावजूद अस्पतालों ने केवल आधी फ्री सेवाएं दीं।
- हरियाणा: 2018 की रिपोर्ट के अनुसार लगभग एक दशक तक कोई निगरानी बैठक नहीं हुई। एक अस्पताल ने 64,000 मरीजों में से सिर्फ 118 को ही फ्री इलाज दिया।
- ओडिशा: 2013-14 की CAG रिपोर्ट में सामने आया कि 45.68 करोड़ की भूमि रियायती दरों पर मिलने के बावजूद अस्पतालों ने मुफ्त इलाज की शर्त पूरी नहीं की।
याचिका में की गई प्रमुख मांगें
- सभी राज्यों में एक समान नीति लागू हो, जिससे सार्वजनिक भूमि पर बने अस्पताल गरीबों को अनिवार्य रूप से फ्री इलाज दें।
- प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में सशक्त निगरानी प्राधिकरण बने और नियमित रिपोर्टिंग हो।
- शर्तों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों पर कड़ा एक्शन लिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा है कि गरीब और कमजोर वर्गों को स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। अब इस मामले में केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा गया है।


















