गरियाबंद की ‘बिहान’ भर्ती में ‘सपनों की बोली’! BPM/AC चयन में ‘अंकगणित का चमत्कार’ – क्या CEO जिला पंचायत करेंगे ‘दूध का दूध, पानी का पानी’?

गरियाबंद: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) / ‘बिहान’ के तहत जिला पंचायत गरियाबंद में बहुप्रतीक्षित BPM (विकासखण्ड परियोजना प्रबंधक) और AC (क्षेत्रीय समन्वयक) संविदा भर्ती प्रक्रिया सूत्रों के अनुसार बड़े सवालों के घेरे में आ गई है। अभी तक आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि यह मामला जल्द ही मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जिला पंचायत गरियाबंद के कार्यालय की चौखट पर दस्तक देगा। चयन प्रक्रिया को लेकर जो गंभीर आरोप लग रहे हैं, उन्हें देखकर ऐसा लग रहा है मानो यह कोई भर्ती नहीं, बल्कि ‘चयन का महाकुंभ’ था, जिसमें अपारदर्शिता और अनियमितता के ‘अद्भुत’ दर्शन हुए हैं।


BPM चयन: जब अनुभवको जादू की छड़ीमिल गई!

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, BPM चयन में ‘अंकों की बाजीगरी’ का एक शानदार प्रदर्शन देखने को मिला है।

अंकों का रहस्यमय खेल: चयनित BPM उम्मीदवार, नीरज सिंह ठाकुर, को लेकर चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। कहा जा रहा है कि यही उम्मीदवार जब कवर्धा और बेमेतरा जैसे अन्य जिलों में इंटरव्यू/कौशल परीक्षा में शामिल हुए, तो उन्हें 2 अंक कम मिले। लेकिन गरियाबंद में आते ही, उन्हें अचानक 2 अंक अधिक मिल गए! सवाल यह है – क्या गरियाबंद की हवा में ऐसा कोई ‘विशेष तत्व’ था, जिसने उनके प्रदर्शन को क्षण भर में चमका दिया, या फिर यह ‘अनुभव प्रमाण पत्र’ के अंक देने में अपनाई गई अद्वितीय उदारता का परिणाम है?

अनुभव प्रमाण पत्र की ‘माया’: सूत्रों का दावा है कि जिस एक साल के अनुभव के बदले अतिरिक्त 2 अंक दिए गए हैं, उसकी सत्यता पर गंभीर संदेह है। CGSRLM की गाइडलाइन के अनुसार, अनुभव महिला सशक्तिकरण और गरीबी उन्मूलन के संबंधित कार्यक्षेत्र का होना अनिवार्य है। सूत्रों की मांग है कि ज्वाइनिंग लेटर, बैंक स्टेटमेंट और सैलरी स्लिप की पारदर्शी जांच हो।

‘प्लानिंग’ के तहत चयन?: यह भी आरोप है कि चयनित BPM पूर्व में जिला गरियाबंद में YP के पद पर BPM के प्रभार पर कार्यरत थे, जिससे यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि यह चयन पूर्व-सुनियोजित प्लानिंग का हिस्सा हो सकता है।

अयोग्यभी हुए योग्य‘: चयन समिति पर उठते सवाल

चयन प्रक्रिया में अपनाई गई प्रक्रियात्मक अनियमितताएं इस ‘अंकगणित के चमत्कार’ को और भी संदिग्ध बनाती हैं:

चयन समिति का ‘गरियाबंद वर्जन’: अन्य जिलों में जहाँ चयन समिति में 5 सदस्य (जिनमें एक NRLM अधिकारी) रहे, वहीं गरियाबंद में सदस्यों की संख्या में बार-बार बदलाव किया गया और समिति में 4 सदस्य रखे गए, जिसमें से दो सदस्य NRLM के ही थे! सूत्रों का कहना है कि यह ‘स्पष्ट संदेह’ पैदा करता है कि चयन को एक विशेष दिशा देने के लिए यह अतिरिक्त व्यवस्था की गई थी।

अनुभव के अंकों का ‘गणितीय भ्रम’: BPM उम्मीदवार के पास कथित तौर पर केवल 5 वर्ष का अनुभव था, लेकिन उन्हें कुल 8 अंक दिए गए! सूत्रों के अनुसार, उन्हें अधिकतम 6 अंक मिलने चाहिए थे। क्या गणित के नियम गरियाबंद जिला पंचायत में काम करना बंद कर चुके हैं?

ST वर्ग का ‘फिल्ड vs अकाउंट्स’ पेंच: ST वर्ग से चयनित श्रीमती संगीता ध्रुव (लेखा सह MIS) को लेकर भी सवाल हैं। सूत्रों का कहना है कि उनके पास फील्ड स्तर का अनुभव नहीं था, जबकि BPM भर्ती के लिए फील्ड अनुभव महत्वपूर्ण माना जाता है। गौरतलब है कि सरगुजा जैसे अन्य जिलों में इसी उम्मीदवार को ‘संबंधित कार्य का अनुभव नहीं’ होने के कारण अपात्र किया गया था, पर गरियाबंद में उन्हें पात्र मान लिया गया!

AC चयन: जब कंप्यूटर ऑपरेटर बना ग्रामीण आजीविका का मसीहा

AC (क्षेत्रीय समन्वयक) पद की भर्ती प्रक्रिया पर तो सूत्रों के अनुसार, ‘भाई-भतीजावाद’ का साया स्पष्ट नजर आता है:

ऑपरेटर से AC तक का सफर: चयनित AC, विजय साहू, के पास सूत्रों के अनुसार विज्ञापित पद हेतु संबंधित कार्यक्षेत्र का अनुभव नहीं है, बल्कि वे एक कंप्यूटर ऑपरेटर थे। यह पद पूर्णतः ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका विकास और गरीबी उन्मूलन से संबंधित है। एक कंप्यूटर ऑपरेटर का AC पद पर चयन करना अपारदर्शिता का स्पष्ट प्रमाण माना जा रहा है।

भर्ती प्रक्रिया के ‘आंतरिक सूत्र’: सबसे गंभीर आरोप यह है कि चयनित AC विजय साहू संबंधित विभाग (NRLM) के कंप्यूटर ऑपरेटर थे और वे भर्ती प्रक्रिया से पूरी तरह जुड़े हुए थे—जैसे कि पात्र/अपात्र सूची तैयार करना, वरीयता सूची बनाना और यहां तक कि कौशल परीक्षा के प्रश्न तैयार करना! सूत्रों का कहना है कि उन्हें चयन प्रक्रिया की हर जानकारी पहले से थी, जो पात्र और योग्य अभ्यर्थियों के साथ सीधा अन्याय है।

CEO जिला पंचायत के सामने होने वालीचुनौती

विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि यह गंभीर मामला जल्द ही CEO जिला पंचायत गरियाबंद के कार्यालय में औपचारिक शिकायत के रूप में प्रस्तुत होने वाला है। शिकायतकर्ता सूत्रों की CEO से यह गुहार है कि इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को तत्काल रद्द/निरस्त किया जाए। उनकी मुख्य मांग है कि एक पूर्ण पारदर्शी चयन समिति का गठन हो और प्रक्रिया को फिर से पूरा किया जाए ताकि वास्तव में योग्य और पात्र उम्मीदवार ही ‘बिहान’ मिशन का हिस्सा बन सकें।

अब सभी की निगाहें CEO जिला पंचायत पर टिकी हैं। यह देखना होगा कि जैसे ही यह मामला उनके संज्ञान में आता है, क्या वह इन ‘अंकों के चमत्कार’ और ‘प्रक्रियात्मक अनियमितताओं’ के गंभीर आरोपों पर सख्त और त्वरित संज्ञान लेते हैं, या फिर यह पूरा मामला जांच के ठंडे बस्ते में जाने की ओर अग्रसर होगा। गरियाबंद की जनता और हजारों योग्य उम्मीदवार, जो इस मिशन से जुड़ने की आस लगाए बैठे थे, अब न्याय की आस में CEO के पहले कदम का इंतजार कर रहे हैं।

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KR. MAHI

CHIEF EDITOR KAROBAR SANDESH

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