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75 क्विटल से अधिक समर्थन मूल्य पर धान बिक्री पर निरस्त होगा राशन कार्ड जानें क्यो?

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए किसान पंजीयन प्रशिक्षण सम्पन्न

विगत खरीफ वर्ष में पंजीकृत किसानों को खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के लिए पंजीकृत माना जायेगा

17 अगस्त से प्रारंभ किसान पंजीयन, 31 अक्टूबर तक किया जायेगा
प्रशिक्षण की बारीकियों को गंभीरता से लेंवे अधिकारी – कलेक्टर

गरियाबंद : जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के लिए समर्थन मूल्य में धान खरीदी हेतु राजस्व, कृषि, उद्यानिकी, सहाकारिता, नान एवं सीसीबी के अधिकारियों तथा समिति प्रबंधक, उपार्जन केन्द्र प्रभारी एवं कम्प्युटर ऑपरेटरों की आज प्रशिक्षण आयोजित की गई। जिला पंचायत गरियाबंद के सभाकक्ष में विकासखण्ड गरियाबंद, छुरा एवं फिंगेश्वर तथा कलेक्टोरेट के सभाकक्ष में विकासखण्ड मैनपुर एवं देवभोग के अधिकारियों को उक्त प्रशिक्षण दी गई। कलेक्टर श्री छतर सिंह डेहरे के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में पंजीकृत किसानों की जानकारी अद्यतन करने, नये किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया, किसान पंजीयन के दौरान ध्यान देने हेतु महत्वपूर्ण बाते और साफ्टवेयर की व्यवस्था आदि के संबंध में खाद्य विभाग के अधिकारियों और मास्टर ट्रेनर्स द्वारा विस्तारपूर्वक जानकारियां दी गई। कलेटर श्री डेहरे ने कहा कि प्रशिक्षण को अधिकारी गंभीरतापूर्वक लेंवे। समर्थन मूल्य में धान खरीदी सरकार की प्राथमिकता में है। जिले के वास्तविक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ दिलाना है। शासन के निर्देश पर राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी किसान द्वारा बोये गये धान रकबा की खेतों में जाकर गिरदावरी तैयार की जा रही है। ताकि धान की वास्तविक रकबे की जानकारी हो सके। कलेक्टर ने कहा कि धान बिक्री हेतु किसानों का फर्जी पंजीयन न हो। किसी भी प्रकार के गड़बड़ी के लिए संबंधित राजस्व अधिकारी जिम्मेदार होंगे। खरीदी के दौरान कम्प्युटर ऑपरेटर को भी सावधानियां बरतनी होगी। कोताही के लिए वे सीधे बर्खास्त होंगे। कलेक्टर ने अधिकारियों को नये किसान पंजीयन के समय विशेष सावधानियां बरतने के निर्देश दिये।
     प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि शासन द्वारा लिए गये निर्णय अनुसार विगत खरीफ वर्ष 2019-20 में पंजीकृत किसानों को खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के लिए पंजीकृत माना जायेगा एवं इसके लिए विगत खरीफ वर्ष 2019-20 में पंजीकृत किसानों की दर्ज भूमि एवं धान तथा मक्के के रकबे एवं खसरे को राजस्व विभाग के माध्यम से अद्यतन किया जायेगा। गत खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में पंजीकृत कृषकों का डेटा अद्यतन किये जाने का कार्य 31 अक्टूबर, 2020 तक किया जायेगा। कृषक पंजीयन व्यवस्था में शामिल तहसील तथा सहकारी अमलों की मॉनीटरिंग की जायेगी। कम्प्यूटर के माध्यम से रेण्डम आधार पर चयनित किसानों के प्रपत्र-1 में अंकित पंजीयन आंकडों की सत्यता की जांच की जावेगी। यदि पटवारी द्वारा सत्यापित रकबे और डाटा एन्ट्री ऑपरेटर के द्वारा ऑन-लाईन एन्ट्री किये गये रकये में भिन्नता होती है तो डाटा एन्ट्री ऑपरेटर, तथा उसके कार्यों के सीधे पर्यवेक्षण हेतु जिम्मेदार सहकारी समिति के प्रबंधक तथा अध्यक्ष की जवाबदेही निर्धारित की जायेगी । यदि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज रकबे और पटवारी के द्वारा सत्यापित रकबे में भिन्नता होती है तो संबंधित पटवारी की तथा उसके कार्यों का पर्यवेक्षण करने वाले राजस्व अमलों की जवाबदेही निर्धारित की जावेगी। गत खरीफ वर्ष 2019-20 में जिन किसानों ने पंजीयन नही करवाया था, किन्तु इस वर्ष जो धान एवं मक्का विक्रय करने हेतु इच्छुक हैं। ऐसे नवीन किसानों का पंजीयन तहसील मॉडयूल के माध्यम से तहसीलदार द्वारा किया जायेगा। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में नवीन कृषकों का पंजीयन 31 अक्टूबर, 2020 तक किया जायेगा।
    किसान पंजीयन हेतु किसान द्वारा बोये गये फसल के वास्तविक रकबे की खसरावार जानकारी ली जायेगी। प्रदेश में उद्यानिकी तथा धान/मक्का से पृथक अन्य फसलों के रकबों को किसी भी परिस्थिति में धान/मक्का के रकबे के रूप में पंजीयन नहीं होगी। गिरदावरी का काम राजस्व विभाग द्वारा समयानुसार किया जाकर पंजीयन हेतु डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। पंजीयन के दौरान सभी कृषकों का आधार नंबर उनकी सहमति से प्राप्त किया जाये। किन्तु आधार नंबर नही होने के कारण किसी कृषक को पंजीयन से वंचित नही किया जाये। प्राप्त आधार नंबरों की गोपनीयता सुनिश्चित की जावे। किसानों द्वारा बोये गये धान एवं धान बीज के रकबे की स्पष्ट खसरावार जानकारी एकत्र किया जाएगा।  
विधिक व्यक्तियों यथा ट्रस्ट/मण्डल/प्रा.लि.कम्पनी/शाला विकास समिति/केन्द्र एवं राज्य शासन के संस्थान आदि संस्थाओं द्वारा संस्था की भूमि को धान बोने के प्रयोजन हेतु यदि अन्य कृषकों को लीज अथवा अन्य माध्यम से प्रदाय किया गया है, तो संस्था की कुल धारित भूमि के अधीन, वास्तविक खेती करने वाले किसान का पंजीयन किया जावे एवं समर्थन मूल्य की राशि इन कृषकों के खातों में भुगतान किया जाये। संस्था की ऋण पुस्तिका/बी-1 आदि सुसंगत राजस्व अभिलेख समिति द्वारा प्राप्त किया जाये। संस्था के अधिकृत व्यक्ति (यथा ट्रस्टी) द्वारा समिति को लिखित में सूचना दी जायेगी कि संस्था की भूमि पर किन कृषकों द्वारा धान की खेती की जावेगी । इस जानकारी के आधार पर संबंधित कृषकों की सहमति से पूर्ण विवरण सहित पंजीयन किया जावेगा एवं एमपीएस का भुगतान इन कृषकों के खातों में किया जावेगा। इस प्रकार संस्थाओं की भूमि पर वास्तविक खेती करने वालों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सकेगा। यही व्यवस्था संयुक्त देयता समूहों/रेघा/अधिया कृषकों के द्वारा धान विक्रय हेतु अपनाई जायेगी। धान विकय से पूर्व पंजीकृत कृषक की मृत्यु हो जाने पर तहसीलदार के द्वारा परिवार के नामांकित व्यक्ति के नाम से धान खरीदी की जा सकेगी। सीमांत तथा लघु कृषक होने के आधार पर जिन लोगों ने प्राथमिकता राशन कार्ड प्राप्त किया है, किंतु ऐसे सीमांत किसान जो 37.5 क्विटल से अधिक मात्रा का समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करेगे एवं ऐसे लघु किसान जो 75 क्विटल से अधिक मात्रा का समर्थन मूल्य पर धान विकय करेंगे, उन्हें चिंहाकित कर उनके राशन कार्ड को निरस्त किया जायेगा। यह प्रावधान कृषक की स्वयं धारित भूमि पर लागू होगा। अर्थात् यदि किसी लघु/सीमांत कृषक ने अधिया/रेघा/लीज से प्राप्त भूमि की उपज भी समर्थन मूल्य पर विकय किया है, तब राशनकार्ड निरस्त नहीं होगा। अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण के दौरान बताये गये बातों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करने कहा गया।

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KR. MAHI

CHIEF EDITOR KAROBAR SANDESH

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