चाय, तेल, शैम्पू, रोजमर्रा की चीजें होंगी महंगी, क्यों गिरने वाली है गाज?

नई दिल्ली/सूत्र : जुलाई-सितंबर तिमाही में एफएमसीजी कंपनियों के मुनाफे में गिरावट देखने को मिली है। इसकी वजह उत्पादन लागत में बढ़ोतरी और महंगाई है। कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ी हैं। इससे कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। शहरी क्षेत्रों में खपत में गिरावट देखी जा रही है। जबकि ग्रामीण बाजारों में स्थिरता बनी हुई है। कंपनियां मुनाफा बढ़ाने के लिए लागत नियंत्रण और रणनीतिक मूल्य बढ़ोतरी पर फोकस कर रही हैं।

तेल, बिस्कुट, तेल और शैम्पू जैसी रोजमर्रा की चीजों की कीमतें जल्द ही बढ़ सकती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) कंपनियां उत्पादन लागत में बढ़ोतरी और खाद्य महंगाई दर के चलते अपनी कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही हैं।

मुश्किल समय का करना पड़ा सामना

एफएमसीजी कंपनियों को जुलाई-सितंबर तिमाही में मुश्किल समय का सामना करना पड़ा है। उत्पादन लागत में वृद्धि और खाद्य मुद्रास्फीति के कारण उनके मुनाफे में गिरावट आई है। इसके अलावा, इन एफएमसीजी कंपनियों की ओर से उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल, जैसे पाम ऑयल, कॉफी और कोको की कीमतों में हाल के हफ्तों में इजाफा हुआ है। नतीजतन, कुछ कंपनियों ने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने की योजना का संकेत दिया है।

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL), गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (GCPL), मैरिको, ITC और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (TCPL) जैसी प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों ने शहरी क्षेत्रों में अपने उत्पादों की खपत में गिरावट पर चिंता व्यक्त की है। यह उनके दैनिक उत्पादों का प्रमुख हिस्सा है।

बाजार की बारीकी से निगरानी करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, एफएमसीजी क्षेत्र में कुल बिक्री का 65-68 फीसदी हिस्सा शहरी क्षेत्रों से आता है। इसके उलट ग्रामीण बाजारों ने शहरी बाजारों की तुलना में अपनी विकास दर बनाए रखी है।

दाम बढ़ाने का क्यों है प्रेशर?

जीसीपीएल के प्रमुख सुधीर सीतापति ने दूसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि वह मौजूदा बाधाओं को एक अस्थायी दौर के रूप में देखते हैं। उन्होंने प्रॉफिट मार्जिन को दोबारा हासिल करने के लिए लागतों को रणनीतिक रूप से कंट्रोल और सावधानीपूर्वक मूल्य वृद्धि करने की अपनी योजना का जिक्र किया। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भारत में उपभोक्ता मांग में गिरावट के बावजूद सिंथॉल, गोदरेज नंबर 1 और HIT जैसे लोकप्रिय ब्रांडों वाली फर्म जीसीपीएल ने तिमाही के दौरान स्थिर प्रदर्शन का दावा किया।

डॉबर इंडिया ने भी सितंबर तिमाही में चुनौतीपूर्ण मांग के माहौल को देखा। इसमें ऊंची खाद्य महंगाई दर और शहरी मांग में गिरावट देखी गई। डॉबर के पास डॉबर च्यवनप्राश, पुदीना हरा और रियल जूस जैसे उत्पाद हैं। जुलाई-सितंबर 2024 तिमाही के दौरान कंपनी ने 17.65 फीसदी की गिरावट के साथ 417.52 करोड़ रुपये का प्रॉफिट दर्ज किया। इस अवधि के दौरान कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यूं 5.46 फीसदी घटकर 3,028.59 करोड़ रुपये रह गया।

मध्यम वर्ग पर पहले ही बोझ

नेस्ले इंडिया के सीएमडी सुरेश नारायणन के अनुसार, मध्यम वर्ग दबाव में है। ऊंची खाद्य महंगाई दर घरेलू बजट को प्रभावित कर रही है। खाद्य मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने फलों, सब्जियों और तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का जिक्र किया। विशेष रूप से, नेस्ले इंडिया के पास मैगी, किट कैट और नेस्कैफे जैसे ब्रांड हैं। कंपनी की घरेलू बिक्री ग्रोथ 1.2 फीसदी रही।

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (TCPL) के प्रमुख सुनील डिसूजा ने शहरवासियों की खर्च करने की आदतों में गिरावट की रिपोर्ट दी है। उन्होंने संकेत दिया कि बढ़ती खाद्य कीमतें जितना हम सोचते हैं उससे कहीं ज्यादा असर डाल सकती हैं।

इसी तरह HUL के सीईओ रोहित जवा ने इस अवधि में बाजार के सुस्त वॉल्यूम की ओर इशारा किया। इसमें शहर-केंद्रित विकास में गिरावट आई है। दिलचस्प बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्र लगातार शहरों से आगे निकल रहे हैं। उन्होंने पिछली वित्तीय तिमाही में भी अपनी रफ्तार बनाए रखी। HUL के पास सर्फ, रिन, लक्स, पॉन्ड्स, लाइफबॉय, लैक्मे, ब्रुक बॉन्ड, लिप्टन और हॉर्लिक्स जैसे ब्रांड हैं।

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KR. MAHI

CHIEF EDITOR KAROBAR SANDESH

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