क्या है?आरबीआई का ‘पॉजिटिव पे’ सिस्टम

मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ‘पॉजिटिव पे’ (Positive Pay)सिस्टम शुरू करने का एलान किया है. चेक का दुरुपयोग रोकना इसका मकसद है. इससे फर्जी चेक के माध्यम से होने वाले फ्रॉड पर भी लगाम लगेगी. आइए जानते हैं यह सिस्टम किस तरह काम करेगा. ‘पॉजिटिव पे’ सिस्टम के तहत किसी थर्ड पार्टी को चेक जारी (इश्यू) करने वाला व्यक्ति अपने बैंक को अपने चेक का डिटेल भी भेजेगा. 50,000 रुपये से ज्यादा रकम के चेक पॉजिटिव पे सिस्टम के तहत आएंगे. इस सिस्टम से एक तरह जहां चेक का इस्तेमाल ज्यादा सुरक्षित बनेगा वही चेक के क्लियरेंस में भी कम वक्त लगेगा.

आरबीआई ने गुरुवार को पेश अपनी क्रेडिट पॉलिसी में पॉजिटिव पे सिस्टम के बारे में बताया था. केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि पॉजिटिव पे सिस्टम से बैंकों के लिए चेक के जरिए होने वाली जालसाजी और फर्जी चेक के इस्तेमाल को रोकना आसान हो जाएगा.

रिजर्व बैंक ने कहा है, “इस मेकानिज्म (Mechanism) के तहत चेक जारी करने वाले व्यक्ति की तरफ से चेक के बारे में दी गई जानकारी के आधार पर ही उसे प्रोसेस किया जाएगा. वॉल्यूम के लिहाज से देश में चेक के जरिए होने वाला करीब 20 फीसदी ट्रांजेक्शन इस सिस्टम के दायरे में आएगा, जबकि वैल्यू के लिहाज से 80 फीसदी ट्रांजेक्शन इस सिस्टम के दायरे में आएगा.” अभी चेक ट्रंकेशन सिस्‍टम (सीटीएस) का इस्तेमाल चेक क्‍लीयरिंग के लिए होता है. सीटीसी में क्लीयरिंग हाउस की ओर से इसकी इलेक्ट्रॉनिक फोटो अदाकर्ता शाखा को भेज दी जाती है. इसके साथ इससे संबंधित जानकारी जैसे एमआईसीआर (MICR code) बैंड के डेटा, प्रस्तुति की तारीख, प्रस्तुत करने वाले बैंक का ब्‍योरा भी भेज दिया जाता है. ऐसे में सीटीसी के माध्यम से कुछ अपवादों को छोड़कर फिजिकल इंस्‍ट्रूमेंटों की एक शाखा से दूसरी शाखा में जाने की जरूरत खत्‍म हो जाती है. यह चेक के एक स्थान से दूसरे स्थान जाने में लगने वाली लागत को खत्‍म करता है. उनके कलेक्‍शन में लगने वाले समय को भी यह कम करता है.

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KR. MAHI

CHIEF EDITOR KAROBAR SANDESH

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