चंद्रयान-3: दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला भारत दुनिया का पहला देश

श्रीहरिकोटा/सूत्र : चंद्रयान-3 के लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखकर इतिहास रच दिया है. इसने चंद्रमा की अंतिम कक्षा से 25 किमी की यात्रा 30 मिनट में पूरी की। लैंडर को धीरे-धीरे नीचे उतारा गया।

5.30 बजे हुई शुरुआती रफ लैंडिंग बेहद सफल रही। इसके बाद 5.40 बजे लैंडर ने वर्टिकल लैंडिंग की. तब चंद्रमा से इसकी दूरी 3 किमी थी।

आखिरकार 6.04 बजे लैंडर ने चांद पर पहला कदम रखा. इस तरह भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला दुनिया का पहला देश बन गया।

वह चंद्रमा के किसी भी हिस्से पर यान उतारने वाला चौथा देश बन गया है। इससे पहले केवल अमेरिका, सोवियत संघ और चीन को ही यह सफलता हासिल हुई है।

अब सभी को विक्रम लैंडर से प्रज्ञान रोवर के बाहर आने का इंतजार है. धूल जमने के बाद यह बाहर आ जाएगा। इसमें लगभग 1 घंटा 50 मिनट का समय लगेगा। इसके बाद विक्रम और प्रज्ञान एक-दूसरे की तस्वीर खींचकर पृथ्वी पर भेजेंगे चंद्रयान।

मोदी ने कहा- चंदा मामा के दूर के नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़कर वैज्ञानिकों को बधाई दी. उन्होंने कहा- ये पल भारत की ताकत का है. ये भारत में नई ऊर्जा, नए विश्वास, नई चेतना का क्षण है। अमृतकाल में अमृतवर्षा हुई है। हमने धरती पर संकल्प लिया और चांद पर उसे साकार किया। हमने अंतरिक्ष में नए भारत की नई उड़ान देखी है।

नया इतिहास बनते ही हर भारतीय जश्न में डूब गया है। पहले कहा जाता था कि चंदा मामा बहुत दूर हैं. एक दिन आएगा जब बच्चे कहेंगे चंदा मामा बस टूर वाले हैं।

भारत से पहले रूस चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लूना-25 उतारने वाला था। यह लैंडिंग 21 अगस्त को होनी थी, लेकिन आखिरी कक्षा बदलते वक्त यह रास्ता भटक गया और चंद्रमा की सतह पर क्रैश हो गया।

चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को सुबह 3.35 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था. चंद्रमा की सतह पर उतरने में इसे 41 दिन लगे। पृथ्वी से चंद्रमा की कुल दूरी 3 लाख 84 हजार किलोमीटर है।

लैंडिंग के बाद क्या होगा?

• डस्ट सेटल होने के बाद विक्रम चालू होगा और संचार करेगा।

• फिर रैंप खुलेगा और प्रज्ञान रोवर रैंप से चंद्रमा की सतह पर आएगा।

• पहिये चंद्रमा की सतह पर अशोक स्तंभ और इसरो लोगो की छाप छोड़ेंगे।

• विक्रम लैंडर प्रज्ञान की और प्रज्ञान विक्रम की तस्वीर लेगा. वे इस फोटो को धरती पर भेजेंगे।

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KR. MAHI

CHIEF EDITOR KAROBAR SANDESH

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