स्कूटर पर स्नैक्स और बिस्किट बेचने वाले ने कैसे खड़ा किया दो लाख करोड़ का बिजनेस?

रायपुर/सूत्र: सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय का मंगलवार 14 नवंबर रात निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के कोकिला बेन अस्पताल में आखिरी सांस ली। बिहार के अररिया जिले के रहने वाले सुब्रत रॉय ने अपने करियर की शुरुआत स्कूटर पर नमकीन बेचने से की थी। इसके बाद वह लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए। एक समय सहारा समूह का कारोबार रियल एस्टेट, फाइनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, मीडिया, एंटरटेनमेंट, हेल्थ केयर, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और एयरलाइन क्षेत्रों तक फैला हुआ था। फिर एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें जेल जाना पड़ा। सुब्रत रॉय सहारा के फर्श से अर्श तक के सफर पर एक नजर…

बिहार के रहने वाले सुब्रत रॉय का पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता में हुई और फिर वे गोरखपुर पहुंचे। साल 1978 में सुब्रत रॉय ने अपने एक दोस्त के साथ स्कूटर पर बिस्किट और नमकीन बेचना शुरू किया। एक कमरे में दो कुर्सियों और एक स्कूटर के साथ उन्होंने 2 लाख करोड़ रुपये की यात्रा की। वह सपने बेचने में माहिर था. उन्होंने एक दोस्त के साथ मिलकर एक चिटफंड कंपनी शुरू की। उन्होंने पैरा बैंकिंग की शुरुआत की. गरीब और मध्यम वर्ग को टारगेट किया। यहां तक कि मात्र 100 रुपये कमाने वाले लोग भी उनके पास 20 रुपये जमा करते थे।

कैसे हुई शुरुआत    

उनकी यह योजना देश की गली-गली में प्रसिद्ध हो गयी। लाखों लोग सहारा से जुड़ने लगे। हालाँकि, वर्ष 1980 में सरकार ने इस योजना पर प्रतिबंध लगा दिया। यही वह दौर था जब सुब्रत रॉय सहारा ने हाउसिंग डेवलपमेंट सेक्टर में प्रवेश किया था। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक सेक्टर में उनके पंख फैलते चले गए। रियल एस्टेट, फाइनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, मीडिया, एंटरटेनमेंट, हेल्थ केयर, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी तक सहारा फैल चुका था। सहारा का डंका देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सुनाई दे रहा था। सहारा ग्रुप 11 साल तक टीम इंडिया का प्रायोजक रहा। जैसे-जैसे सहारा का कारोबार बढ़ता गया, सुब्रत रॉय की संपत्ति दोगुनी, चौगुनी हो गई।

सहारा अपनी लाइफस्टाइल, लग्जरी के लिए मशहूर होते चले गए। उनके पास अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में 4400 करोड़ रुपये के दो आलीशान होटल हैं। मुंबई के एबीवैली में 313 एकड़ का डेवलपमेंट साइट, मुंबई के बरसोवा में 113 एकड़ की जमीन है। सुब्रत ने अपना पूरा शहर लखनऊ के गोमतीनगर में 170 एकड़ ज़मीन पर बसाया। उनके पास देश के अलग-अलग हिस्सों में 764 एकड़ जमीन है। माना जाता है कि उन्होंने अपने बेटों की शादी की तो उसमें 500 करोड़ से ज्यादा का खर्च किया था। कई जानी-मानी हस्तियां इस शादी में पहुंची थीं।

पतन का कारण

टाइम्स मैगजीन ने सहारा को रेलवे के बाद दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता बताया था. 11 लाख से ज्यादा कर्मचारी सहारा परिवार का हिस्सा थे। लेकिन फिर किस्मत ने ऐसी बाजी पलटी कि किसी को अंदाजा तक नहीं था कि खुद को सहारा श्री कहने वाले सुब्रत रॉय के दिन ऐसे फिरेगें कि उन्हें जेल की हवा खानी पड़ेगी। वह साल 2009 था, जब सहारा ने कंपनी का आईपीओ लाने की योजना बनाई थी। जब सहारा ने सेबी के पास आईपीओ के लिए आवेदन किया तो सेबी ने उससे डीआरएचपी यानी कंपनी का पूरा बायोडाटा मांगा।

सहारा के बुरे दिन की शुरूआत हो चुकी थी। साल 2009 में सहारा ने अपनी दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल इस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इवेस्टेमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड का आईपीओ लाने का प्रस्ताव सेबी के सामने रखा। सेबी को सहारा के दस्तावेजों में अनियमितताएं मिलीं। सहारा पर अपने निवेशकों के पैसे का दुरुपयोग करने का आरोप लगा था। सेबी का आरोप है कि सहारा ने अपनी दो कंपनियों के 3 करोड़ निवेशकों से 24,000 करोड़ रुपये जुटाए, जबकि उनकी कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं थीं. नियमों के उल्लंघन के मामले में सहारा पर 12000 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

जब सेबी ने सहारा से निवेशकों की जानकारी और दस्तावेज मांगे तो सहारा की ओर से 127 ट्रक दस्तावेज भेजे गए। इन ट्रकों के कारण मुंबई के बाहरी इलाके में ट्रैफिक जाम हो गया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। जहां सुब्रत रॉय की ओर से मशहूर वकील राम जेठमलानी ने दलीलें पेश कीं. उन्होंने सुब्रत रॉय को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। सुप्रीम कोर्ट का रुख सुब्रत रॉय के प्रति सख्त रहा। सहारा को निवेशकों के पैसे 15 प्रतिशत ब्याज के साथ 24000 करोड़ रुपये लौटाने का निर्देश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने पर फरवरी 2014 में सुब्रत रॉय को गिरफ्तार कर लिया गया। दो साल जेल में रहने के बाद वो पेरोल पर बाहर आए।

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KR. MAHI

CHIEF EDITOR KAROBAR SANDESH

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